Tree Guard

पौध रक्षक- आपको पता ही होगा कि जिस प्रकार मानव शरीर के आंतरिक भाग की रक्षा के लिये मांस एक सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता हैं, ठीक उसी प्रकार पौधों की रक्षा के लिये पौध रक्षक होते हैं, और बाँस से बने पौध रक्षकों का तो कोई जवाब नहीं। आइये इन्हीं बाँस के पौध रक्षकों के बारे में हम आपको कुछ रोचक बातें बताते हैं-

बाँस के पौध रक्षकों का प्रयोग पोधो को बाहरी कारको जैसे आँधी, तूफान, अतिवृष्टि, जानवरों आदि से सुरक्षित रखने का यह एक इको फ्रेंडली तरीका है। इसका प्रयोग हम जंगल में भी करते हैं, क्योंकि जब दीमकों का आक्रमण हो तो लड़ाई में पौधों से पहले ये भाग ले सकें, बाँस के सेलुलोस से अपना पेट लें और पौधों पर आक्रमण ना करें। सबसे दिलचस्प बात यह हैं कि यदि बाँस के पौध-रक्षक ख़राब हो जाते हैं तो उन्हें उर्वरक निर्मित करने की सामग्री के रूप में किया जा सकता हैं।

वैसे तो इको- फ्रेंडली होना ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है लेकिन इसके पीछे विज्ञानीय महत्व का दांव-पेंच भी छुपा हुआ है। क्या आपको पता हैं, बांस के पौध-रक्षक बंद होते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि तेजी से होती हैं । अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यूँ होता हैं., लोतो हम आपको बता ही देते हैं कि आखिर ऐसा क्यूँ होता हैं। तो अधिकांश पौधे प्रकाश की ओर गति कर के अपना भोजन बनाने की दर को बढ़ा लेते हैं, जो पौधे के बढ़ने में भी मदद करता हैं । अगर धूप केवल ऊपर से ही मिलती है, पौधा, उस धूप की तरफ अपने को बढाता है। सूर्य के अधिक ताप से बांस के पौध रक्षक गर्म नहीं होते है, जिससे पौधों में विकसित हुई नई पत्तियाँ और जड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।

इंग्लैंड जैसे देशों में, इस काम के लिए प्लास्टिक के पाइप का उपयोग किया जाता है। पादप विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई लाभ बताये गये जिसमें पेड़ का शीघ्रता से सीधा व लम्बा हो जाना भी एक हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें ऐसा खास क्या है जब यह सुझाव उदयपुर पहुँचा तो बाँस की टोकरी से प्रेरित होकर प्लास्टिक को बाँस से बदल दिया गया और इस प्रकार जंगल के पौधों के लिए बाँस के ट्री गार्ड का जन्म/उदगम हुआ।