Nursery

जंगल में निर्मित नर्सरी पहले छोटे से हिस्से में अपने अस्तित्व को बनाए हुए थी लेकिन छोटे से हिस्से तक सीमित रहना उसे पसंद नहीं आया।
सीखने की कला ऐसी है जो जीवन पर्यन्त चलती रहती है। कुछ ऐसा ही नजारा जंगल में देखा गया, जिसमें जंगल में लम्बे समय से काम करने वाले लोग भागीदार बने। लोगों ने नर्सरी को विस्तृत करने के लिए पौधे जमाने के लिए बेड खोदी, खाद मिट्टी और रेत को सही मात्रा में मिलाकर थैलिया भरना, पौधों को उचित समय पर पानी पिलाना, निराई, गुड़ाई, थैलियों में बीज लगाना, पौधों की कटिंग से नये पौधे तैयार करना, थैलियाँ बदलना सीखा।
इसी सीखने की प्रक्रिया को जारी रखते हुए, नर्सरी में बाँस, घास और जूट की रस्सी का उपयोग कर छाया के लिए छत बनाकर नर्सरी का रूप बदला गया।
जंगल में काम करने वाले लोगों ने नर्सरी के विस्तार को व्यर्थ साबित नहीं होने दिया। अब लगातार बीजों को इक्कट्ठा करके नर्सरी में पौधे लगाए जा रहे है।