Vol. story 4

२४ मार्च  २०२० वो दिन था जब पुरे भारत देश में  लॉक डाउन घोषित हुआ। ऐसा पहली बार देखा जब पूरा देश रुक  गया था। इंसान रुक गया पर उसकी सोच कहाँ रुकने वाली थी। शुरू के कुछ दिन तो तनाव में  बीते फिर  धीरे धीरे सब नार्मल होने लगा। गर्मी  के दिन वैसे ही बड़े लगते हैं, पूरा दिन तो ऑफिस का काम करने में  बीत जाता, शाम को क्या किया जाये। घर में  ही थोड़ा भूखंड खाली है जहाँ कभी-कभी हम कोई माली बुला कर सब्जी लगवा लेते थे। 

अभी वह जगह उजाड़ पड़ी थी, सोचा शाम के समय का सही उपयोग यहाँ हो सकता है। उस जगह को रोज़ थोड़ा – थोड़ा साफ़ किया, इसमें करीब १० दिन  लगे। फिर वहां की खुदाई शुरू की तो और ५ दिन  निकल गए। तब फिर  कुछ सब्जियों  के  बीज बोये। शाम को उनको पानी देना, खरपतवार हटाना ये सब रूटीन में शामिल  हो गया। आज वहां से लौकी, तुरई, भिंडी, हरी मिर्ची, टमाटर, करेला, चंवला, ककड़ी, टिंडा आदि मिल जाता है। मुझे बाहर से सब्जी खरीदने की जरुरत ही नहीं पड़ती हैं।   

इससे एक तो समय का सदुपयोग हो गया, घर की ताज़ा सब्जी मिल गई और कुछ नया सीखने को मिला।  

खुद की मेहनत की सब्जी ने खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा दिया।